अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू

""अलविदा! 😊👌
आ...
Ummah Post
19 November, 2024

अस्सलामू अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातहू

""अलविदा! 😊👌

आखरी पोस्ट...

"फ़ि अमानिल्लाह" (अल्लाह के हिफ़ाज़त में रहें) 😔....... वक़्त की कमी की वजह से और ज़ाती (व्यक्तिगत) मसरूफ़ियात के कारण अब मैंने सोशल मीडिया, ख़ासकर Islamic Tube App से हमेशा-हमेशा के लिए दस्तबरदारी (दूरी बनाने) का अंतिम फ़ैसला कर लिया है-

मुझे अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ लोग जो मेरे साथ जुड़े थे, उन्हें छोड़कर जाना मेरे लिए बेहद मुश्किल है 😭😭

आप सब बहुत अच्छे हैं

आप सब ने मुझे बहुत इज़्ज़त दी... इसके लिए दिल की गहराइयों से आपकी शुक्रगुज़ार हूँ...

अगर किसी को मेरी कोई बात बुरी लगी हो या मेरी किसी पोस्ट से आपको किसी क़िस्म की तकलीफ़ हुई हो तो प्लीज दिल से माफ़ कर देना 🙏🙏🙏😢😢

जाने से पहले एक शेर आप सबकी नज़र करके इजाज़त चाहूँगा.!!!!

"आए थे मिस्ल-ए-बुलबुल सैर-ए-गुल्शन कर चले,

संभाल माली अपना बाग़ हम तो अपने घर चले।"

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

.

आख़िर में बता दूँ 🫡

पता नहीं यह किसकी पोस्ट है।

मैंने तो कॉपी पेस्ट की है।

🤪🤪🤭🤭

Share this article
घी चोर नौकर
लेख

घी चोर नौकर

एक व्यक्ति एक किराने की दुकान पर नौकरी करता था। वह किसी न किसी बहाने दुकान से कुछ न कुछ चोरी करता रहता था। दुकान का मालिक बहुत ही खुशमिज़ाज (अच्छे अख़्लाक़ वाला) और ईमानदार इंसान था। वक़्त गुज़रता गया और दस-बारह साल बीत गए। अल्लाह ने मालिक को खूब बरकत दी और उसकी दुकान शहर की सबसे बड़ी दुकान बन गई...