गाजा की हमारी माताओं और बहनों की दृढ़ता (इस्तकामत) को देखें,...
Ummah Post
20 November, 2024

गाजा की हमारी माताओं और बहनों की दृढ़ता (इस्तकामत) को देखें, ये हुसैन (रज़ि.) के वास्तविक वारिस हैं, जिन्होंने ज़ुल्म और सितम के बाद भी ईमान और हया को जीवित रखा, सब्र को जीवित रखा, और केवल अल्लाह तआला से मददगार की मांग रखी।

यह सिर पीटने वाली कौम हरगिज़ नहीं है, जिनका इस्लाम से, नबी (अलैहिस्सलाम) से और अहले बैत (रज़ि.) से कतई कोई संबंध नहीं है!

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कलमा पढ़ी हुई मेम
लेख

कलमा पढ़ी हुई मेम

हमारे एक दोस्त थे; ज़ेहन (सोच) इस्लामी, लेकिन चेहरा-मोहरा ग़ैर-इस्लामी। हम सिर्फ़ उनके ज़ेहन पर ही अल्लाह का शुक्र अदा करते थे। मौसूफ़ (महोदय) कुछ समय के लिए इंग्लैंड तशरीफ़ ले गए, और जब उनकी वापसी हुई तो बगल में एक मेम (गोरी मेम) थीं! चूँकि मौसूफ़ का ताल्लुक एक पारंपरिक परिवार से था, इसलिए यह ख़...