القرآن - سورۃ نمبر 71 نوح
آیت نمبر 4

أَعُوذُ بِاللَّهِ...
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20 March, 2025

القرآن - سورۃ نمبر 71 نوح

آیت نمبر 4

أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

يَغۡفِرۡ لَـكُمۡ مِّنۡ ذُنُوۡبِكُمۡ وَيُؤَخِّرۡكُمۡ اِلٰٓى اَجَلٍ مُّسَمًّى‌ؕ اِنَّ اَجَلَ اللّٰهِ اِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُ‌‌ۘ لَوۡ كُنۡتُمۡ تَعۡلَمُوۡنَ ۞

मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी:

"अल्लाह तुम्हारे गुनाहों की मग़फ़िरत (क्षमा) फ़रमाएगा, और तुम्हें एक मुक़र्रर (तय) वक़्त तक बाक़ी रखेगा। बेशक जब अल्लाह का मुक़र्रर किया हुआ वक़्त आ जाता है तो फिर वो मोअख़्ख़र (टालना/विलंबित) नहीं होता। काश कि तुम समझते होते।"

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"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो हुआ वह सन्नाटे से गूंजता हुआ एक कमरा था। बंद दरवाजे के पीछे महीनों से खामोश पड़ी एक लाश थी, और आस-पास न कोई रोने वाली आँख...