القرآن - سورۃ نمبر 71 نوح
آیت نمبر 4
أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
يَغۡفِرۡ لَـكُمۡ مِّنۡ ذُنُوۡبِكُمۡ وَيُؤَخِّرۡكُمۡ اِلٰٓى اَجَلٍ مُّسَمًّىؕ اِنَّ اَجَلَ اللّٰهِ اِذَا جَآءَ لَا يُؤَخَّرُۘ لَوۡ كُنۡتُمۡ تَعۡلَمُوۡنَ ۞
मुफ़्ती मोहम्मद तक़ी उस्मानी:
"अल्लाह तुम्हारे गुनाहों की मग़फ़िरत (क्षमा) फ़रमाएगा, और तुम्हें एक मुक़र्रर (तय) वक़्त तक बाक़ी रखेगा। बेशक जब अल्लाह का मुक़र्रर किया हुआ वक़्त आ जाता है तो फिर वो मोअख़्ख़र (टालना/विलंबित) नहीं होता। काश कि तुम समझते होते।"