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आदात, अख़लाक़ और तर्ज़-ए-अमल ख़ून और नस्ल दोनों की पहचान करा देते हैं

आदात, अख़लाक़ और तर्ज़-ए-अमल ख़ून और नस्ल दोनों की पहचान करा देते हैं

एक बादशाह के दरबार में एक अजनबी नौकरी की तलब लिए हाज़िर हुआ, क़ाबिलियत पूछी गई, कहा कि मैं सियासी हूँ। बादशाह के पास सियासतदानों की भीड़ रहती थी, उसे ख़ास घोड़ों के अस्तबल का इंचार...

30 Oct, 2026 और पढ़ें
शैतान के तीन हथियार

शैतान के तीन हथियार

हज़रत सय्यिदुना वहब बिन मुनब्बिह रहमतुल्लाहि अलैह से नक़्ल है: बनी इसराईल का एक आबिद (इबादत करने वाला) अपने इबादतख़ाने में एक लंबे अरसे से इबादत में मशग़ूल था। वह मुजाहदे करता औ...

18 Oct, 2026 और पढ़ें
एक इबरतनाक जुर्म की दास्तान और मां की ममता

एक इबरतनाक जुर्म की दास्तान और मां की ममता

हज़रत मालिक बिन दीनार (अल्लाह उन पर रहम करे) फ़रमाते हैं: "मैंने अपने जीवन में 60 हज किए। एक हज के मौक़े पर मैंने मक्का मुकर्रमा में असाधारण भीड़ देखी, जहाँ लाखों लोगों का एक अज़ीम...

06 Jun, 2026 और पढ़ें
आज ही तो ग़रीबी का असली मज़ा मिला है

आज ही तो ग़रीबी का असली मज़ा मिला है

एक गाँव में एक ग़रीब नाई रहा करता था जो एक पेड़ के नीचे कुर्सी लगाकर लोगों की हजामत (बाल-दाढ़ी) बनाया करता था। उसकी गुज़र-बसर बहुत मुश्किल से हो रही थी। उसके पास रहने को न कोई घर थ...

18 Oct, 2025 और पढ़ें
पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

पिता का शिक्षाप्रद उत्तर

अबुल कलाम कहते हैं: एक रात खाने के समय मेरी माँ ने सालन (सब्ज़ी) और जली हुई रोटी मेरे पिता के आगे रख दी। मैं पिता की प्रतिक्रिया का इंतज़ार करता रहा कि शायद वह ग़ुस्से का इज़हार...

31 Aug, 2025 और पढ़ें
खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

खौफ-ए-इलाही (अल्लाह का डर) भी मारिफत (पहचान) का नतीजा है!!

इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा...

21 Jul, 2025 और पढ़ें
कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात

कारोबारी लाइन में मर्द-ओ-ज़न का इख़्तिलात

मलफ़ूज़ात : हज़रत मौलाना मोहम्मद हकीम अख्तर साहब रहमतुल्लाह अलैह - व्यापारिक (کاروباری) लाइन में भी मर्द और औरत का इख़्तिलात (मेल-जोल) उरूज (चरम) पर है, देखिए! अव्वल (पहले) तो...

26 Jun, 2025 और पढ़ें
दीवार पर पिता के हाथों के निशान।

दीवार पर पिता के हाथों के निशान।

अब्बा जी बूढ़े हो गए थे और चलते-चलते दीवार का सहारा लेते थे। नतीजतन दीवारों का रंग खराब होने लग गया, जहां भी वह छूते थे वहां दीवारों पर उनकी उंगलियों के निशान छप जाते थे। मेरी प...

19 Jun, 2025 और पढ़ें
शीशे से दीवार तक

शीशे से दीवार तक

एक महिला कहती हैं: एक दिन मैं अपने घर की सफ़ाई कर रही थी, इतने में मेरा बेटा आया और शीशे का एक नायाब तोहफा (शाहकार) गिरा दिया और वह टूट गया। मैं उससे बहुत नाराज़ थी क्योंकि यह बहु...

18 Jun, 2025 और पढ़ें
माल्टा के घाव: हज़रत शैखुल हिंद की महान क़ुर्बानियां और अटूट ईमान

माल्टा के घाव: हज़रत शैखुल हिंद की महान क़ुर्बानियां और अटूट ईमान

हज़रत शैखुल हिंद को दीन (धर्म) के लिए बड़ी क़ुर्बानियां देनी पड़ीं। उनके हालात-ए-ज़िंदगी (जीवनी) में लिखा है कि जब उनका देहांत हकीम मोहम्मद अजमल की कोठी पर हुआ, तो ग़ुस्ल (अंतिम स्...

17 Jun, 2025 और पढ़ें
पागल टैक्सी ड्राइवर — (एक खामोश हीरो की कहानी)

पागल टैक्सी ड्राइवर — (एक खामोश हीरो की कहानी)

इमरजेंसी वार्ड की गहमागहमी में एक अजनबी दाखिल हुआ। कंधों पर वक्त का बोझ, हाथों में एक बेहोश औरत, और पीछे दो बच्चे, जिनके चेहरों पर खौफ और आंखों में नमी थी। डॉक्टर ने मरीज को देखा,...

17 Jun, 2025 और पढ़ें
शम्अ-ए-फ़रोज़ां: दीने हक़ और इब्राहीमी फ़ित्ना

शम्अ-ए-फ़रोज़ां: दीने हक़ और इब्राहीमी फ़ित्ना

(मुलाख़्ख़स - इस्लामिक ट्यूब प्रो ऐप) अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक मुक़र्रर रास्ता बनाया है। खाना मुँह से मेदे तक जाता है, जहाँ लुआब इसे हज़्म के क़ाबिल बनाता है। साँस नाक से फ...

14 Jun, 2025 और पढ़ें