शैतान के तीन हथियार
हज़रत सय्यिदुना वहब बिन मुनब्बिह रहमतुल्लाहि अलैह से नक़्ल है: बनी इसराईल का एक आबिद (इबादत करने वाला) अपने इबादतख़ाने में एक लंबे अरसे से इबादत में मशग़ूल था। वह मुजाहदे करता औ...
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हज़रत सय्यिदुना वहब बिन मुनब्बिह रहमतुल्लाहि अलैह से नक़्ल है: बनी इसराईल का एक आबिद (इबादत करने वाला) अपने इबादतख़ाने में एक लंबे अरसे से इबादत में मशग़ूल था। वह मुजाहदे करता औ...
यह्या बिन यह्या बयान करते हैं: जब इमाम मालिक (रहमतुल्लाह अलैह) की मृत्यु-शय्या की बीमारी लंबी हो गई और अंतिम समय करीब आ गया, तो मदीना मुनव्वरा और अन्य शहरों से सभी उलेमा (विद्वान)...
हज़रत मालिक बिन दीनार (अल्लाह उन पर रहम करे) फ़रमाते हैं: "मैंने अपने जीवन में 60 हज किए। एक हज के मौक़े पर मैंने मक्का मुकर्रमा में असाधारण भीड़ देखी, जहाँ लाखों लोगों का एक अज़ीम...
हमारे घर के करीब एक बेकरी है। अक्सर शाम के वक्त काम से वापसी पर मैं वहां से सुबह नाश्ते के लिए कुछ सामान लेकर घर जाता हूं। आज जब सामान लेकर बेकरी से बाहर निकल रहा था कि हमारे पड़ोस...
🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते...
एक पर्यटक मैक्सिको पहुँचा, जहाँ उसने स्थानीय मछुआरों की उत्तम मछलियों की प्रशंसा की और पूछा: “इन्हें पकड़ने में कितना समय लगता है?” मछुआरों ने जवाब दिया: “ज़्यादा नहीं!” पर्...
दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...
बहुत समय पहले एक जगह सेब का एक बहुत बड़ा पेड़ था और रोजाना एक बच्चा वहाँ आकर उस पेड़ के इर्द-गिर्द खेला करता था। वह बच्चा उस पेड़ की टहनियों से चिपक-चिपक कर उसकी चोटी पर चढ़ता, उसक...
हज़रत दाऊद बिन रशीद (रह.) फ़रमाते हैं: मुल्क-ए-शाम (सीरिया) में दो हसीन-ओ-जमील इबादतगुज़ार नौजवान रहते थे। कसरत-ए-इबादत (अधिक इबादत) और तक़्वा व परहेज़गारी की वजह से उन्हें 'सबीह'...
हज़रत वाला (रह.) की तरफ़ से अपने सारे मुरीदीन (शिष्यों) और मुतअल्लिक़ीन (परिचितों) को यह हिदायत थी कि जब कभी रेलवे में सफ़र करो, और तुम्हारा सामान उस मिक़दार (मात्रा) से ज़ायद (अधि...
मेरे बुख़ारी शरीफ़ के उस्ताद-ए-मोहतरम, साकिन-ए-बक़ी (बक़ी के निवासी), हज़रत अक़दस मौलाना इस्लाम-उल-हक़ साहब रहमतुल्लाह अलैह ने बुख़ारी शरीफ़ के दर्स (व्याख्यान) में एक क़ीमती बात ब...
यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो...