एक माँ द्वारा हलाल और हराम का ख़ूबसूरत सबक़
यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो...
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यह कहानी डॉक्टर मोहम्मद रातिब अल-नाबुलसी की है जो वह अपनी माँ के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं कि एक दिन जब वह छोटे थे, उनकी माँ ने उनसे पूछा: "क्या तुम शब्द 'हलाल' कह सकते हो...
एक दिन एक शासक (राजा) महल में बैठा हुआ था। तभी उसने महल के बाहर एक सेब बेचने वाले को आवाज़ लगाते हुए सुना: "सेब खरीदें! सेब!" शासक ने बाहर देखा कि एक ग्रामीण आदमी अपने गधे पर स...
आज के दौर में जब सामाजिक बदलाव और आधुनिक तकनीक (टेक्नोलॉजी) का दबदबा बढ़ता जा रहा है, बच्चों के लिए मोबाइल, टीवी और अन्य मनोरंजन के साधनों में व्यस्त होना आसान हो गया है। इंटरनेट औ...
(१) अल्लाह तआला जब किसी को औलाद दे और वह सयानी (समझदार) होने लगे, तो सबसे पहले उसको कलमा-ए-तौहीद (एकेश्वरवाद का मूलमंत्र) सिखाए। फिर उसको ज़रूरी आदाब (शिष्टाचार) सिखाए। (२) जब साम...
सुल्तान महमूद गज़नवी का दरबार लगा हुआ था। दरबार में हज़ारों लोग शामिल थे जिनमें औलिया, कुत्ब और अब्दाल भी थे। सुल्तान महमूद ने सबको संबोधित करके कहा, "क्या कोई शख्स मुझे हज़रत ख़िज...
जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा... "ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?" बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ...
एक बिजली के खंभे पर एक कागज चिपका देखकर मैं करीब चला गया और उस पर लिखी तहरीर (लिखावट) पढ़ने लगा। लिखा था.........! "बराय-ए-करम (कृपया) ज़रूर पढ़ें। इस रास्ते पर कल मेरा 50 रु...
बादशाह ने गुलाम से पूछा: "तुम नौकरी छोड़कर क्यों जा रहे हो?" गुलाम ने बोला: "पांच कारण (असबब) हैं।" "पहला कारण यह है कि आप बैठे रहते हैं, मैं आपके सामने खड़ा रहता हूँ, जबकि...
हकीमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी (रहमतुल्लाही अलैहि) से थाना भवन में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बैअत (आध्यात्मिक दीक्षा) का अनुरोध किया, जिसके जवाब में आपने उन्हें अपना परिच...
"रहमान" शब्द का प्रयोग अल्लाह तआला के अलावा किसी और के लिए करना जायज़ नहीं है, बल्कि हराम है। अगर कोई व्यक्ति किसी इंसान को "रहमान" कहे तो यह शिर्क है, क्योंकि अल्लाह तबारक व तआला...
रवायत है कि सात सौ बरस पहले इस्फ़हान में एक मस्जिद बन रही थी। काम तक़रीबन ख़त्म हो चुका था और कारीगर छोटे-छोटे आख़िरी काम कर रहे थे। एक बूढ़ी औरत का वहाँ से गुज़र हुआ। वह अचानक खड़...