राजा का सींग:
एक राजा हमेशा अपना सिर ढक कर रखता था। उसे कभी किसी ने नंगे सिर नहीं देखा था। बहुत से लोगों ने इस रहस्य को जानने की कोशिश की, लेकिन राजा हर बार बड़ी कुशलता से बात का रुख मोड़कर जवाब...
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एक राजा हमेशा अपना सिर ढक कर रखता था। उसे कभी किसी ने नंगे सिर नहीं देखा था। बहुत से लोगों ने इस रहस्य को जानने की कोशिश की, लेकिन राजा हर बार बड़ी कुशलता से बात का रुख मोड़कर जवाब...
लंदन में एक इमाम साहब रहते थे। रोज़ाना घर से मस्जिद जाने के लिए बस पर सवार होकर दूर मस्जिद तक जाना उनका नियम था। लंदन में तय समय और एक ही रूट पर बसों में सफर करते हुए कई बार ऐसा हु...
एक शादी समारोह में, एक सज्जन अपने एक परिचित व्यक्ति के पास गए और पूछा, "क्या आपने मुझे पहचाना?" उन्होंने ध्यान से देखा और कहा, "हाँ, तुम मेरे प्राइमरी स्कूल के छात्र हो। आजकल क्या...
एक आदमी ने हातिम ताई से पूछा: "ऐ हातिम! क्या सख़ावत (उदारता) में कोई तुमसे आगे बढ़ा है?" हातिम ने जवाब दिया: "हाँ! कबीला-ए-तय का एक यतीम (अनाथ) बच्चा मुझसे ज़्यादा सखी निकला, जिसका...
हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते...
इरान का एक राजा सर्दियों की एक शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था, तो उसने एक ऐसे बूढ़े दरबान (चौकीदार) को देखा जो महल के मुख्य द्वार पर पुरानी और बारीक वर्दी पहने पहरा दे रहा था।...
एक फ्रांसीसी महिला अपने चौदह वर्षीय बेटे को लेकर फ्रांस के एक इस्लामिक सेंटर में आई ताकि उसका बेटा मुसलमान हो जाए। वे दोनों इस्लामिक सेंटर पहुँचे اور इस्लामिक सेंटर के डायरेक्टर के...
हज़रत बिलाल (रज़ि.) से एक बार किसी ने पूछा कि "आपने पहली बार हुज़ूर नबी करीम ﷺ को कैसे देखा?" हज़रत बिलाल (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि "मैं मक्के के लोगों को बहुत ही कम जानता था। क्योंकि...
इमाम अबू यूसुफ (रह.) खलीफा हारून रशीद के ज़माने में पूरे इस्लामी जगत के मुख्य न्यायाधीश (काज़ी-उल-कुज़ात) थे। एक बार उनके पास खलीफा हारून रशीद और एक ईसाई नागरिक का मुकदमा आया। इमाम...
इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा...
"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो ह...
यौम-ए-आशूरा बड़ा ही महत्वपूर्ण और महानता का हामिल दिन है, इतिहास की महान घटनाएँ इससे जुड़ी हुई हैं; चुनाँचे इतिहासकारों ने लिखा है कि: (1) यौम-ए-आशूरा में ही आसमान और ज़मीन, क़ल...