अमानत व दियानत की आला तरीन मिसाल
नाज़िम नदवतुल उलमा हज़रत मौलाना बिलाल अब्दुल हई साहब हसनी नदवी ज़ीद मजदुहू ने दारुल उलूम के साबिक़ मोहतमिम हज़रत उस्ताज़ डॉक्टर मौलाना सईदुर्रहमान साहब आज़मी नदवी रह. के हवाले से य...
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नाज़िम नदवतुल उलमा हज़रत मौलाना बिलाल अब्दुल हई साहब हसनी नदवी ज़ीद मजदुहू ने दारुल उलूम के साबिक़ मोहतमिम हज़रत उस्ताज़ डॉक्टर मौलाना सईदुर्रहमान साहब आज़मी नदवी रह. के हवाले से य...
आज पूरी दुनिया में मुसलमानों पर आफ़ात और मुसीबतें उमड़-उमड़ कर आ रही हैं। अगर इसकी वजह यह बताई जाए तो गलत न होगा कि यह मुसीबत बुराइयों, बेपर्दगी, अजनबी पुरुषों का अजनबी महिलाओं से...
लेखक: मौलाना मोहम्मद सईद पालनपुरी शिक्षक: जामिया अल-इमाम मोहम्मद अनवर शाह कश्मीरी, देवबंद मेरे आदरणीय पिता हज़रत मौलाना मुफ़्ती सईद अहमद साहब पालनपुरी, पूर्व शेख-उल-हदीस और स...
हज़रत मालिक बिन दीनार (अल्लाह उन पर रहम करे) फ़रमाते हैं: "मैंने अपने जीवन में 60 हज किए। एक हज के मौक़े पर मैंने मक्का मुकर्रमा में असाधारण भीड़ देखी, जहाँ लाखों लोगों का एक अज़ीम...
कहानी का शीर्षक: "पिताजी ने कहा था जल्दी वापस आऊँगा... मगर ग्यारह साल बीत गए" मैं सिर्फ़ आठ साल का था जब पिताजी ने घर से जाते हुए मेरे सिर पर हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा: "बेटा,...
एक गाँव में एक ग़रीब नाई रहा करता था जो एक पेड़ के नीचे कुर्सी लगाकर लोगों की हजामत (बाल-दाढ़ी) बनाया करता था। उसकी गुज़र-बसर बहुत मुश्किल से हो रही थी। उसके पास रहने को न कोई घर थ...
एक राजा ने अपने मंत्री से कहा, "एक बात समझ नहीं आती कि मेरे पास दुनिया जहान की हर सुख-सुविधा का सामान है, लेकिन फिर भी दिल खुश नहीं रहता। वहीं मेरे खादिम (सेवक) के पास कुछ नहीं है,...
एक शादी समारोह में, एक सज्जन अपने एक परिचित व्यक्ति के पास गए और पूछा, "क्या आपने मुझे पहचाना?" उन्होंने ध्यान से देखा और कहा, "हाँ, तुम मेरे प्राइमरी स्कूल के छात्र हो। आजकल क्या...
इरान का एक राजा सर्दियों की एक शाम जब अपने महल में दाखिल हो रहा था, तो उसने एक ऐसे बूढ़े दरबान (चौकीदार) को देखा जो महल के मुख्य द्वार पर पुरानी और बारीक वर्दी पहने पहरा दे रहा था।...
इमाम जलालुद्दीन रूमी (रह.) ने लिखा है कि एक आदमी सफर पर निकला। वह एक जंगल में चलता रहा और बहुत दूर चलने के बाद उसे भारी थकान महसूस हुई, जिसके कारण उस पर नींद हावी हो गई। उसने सोचा...
हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھا...