ऐसी नमाज़ अब कौन पढ़ेगा?
बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम...
परिणाम दिखाए जा रहे हैं: "humility"
बयान किया जाता है कि एसाम बिन यूसुफ, हज़रत हातिम असम्म रहमतुल्लाह अलैह की मजलिस में आए और उन पर आपत्ति (ऐतराज़) करना चाहा। अतः एसाम ने हातिम से कहा: "ऐ अबू अब्दुल रहमान!" (यह हातिम...
हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ि.) एक बहुत महान सहाबी (पैगंबर के साथी) थे। सभी सहाबा इकराम में उन्होंने सबसे लंबी उम्र पाई थी। वह सभी लोगों की सेवा करते थे और बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते...
हज़रत मौलाना सैयद असग़र हुसैन रहिमतुल्लाह अलैह (जो अपने मिलने वालों में हज़रत मियां साहब के नाम से मशहूर थे) दारुल उलूम देवबंद के उन उस्तादों में से थे जो शोहरत और नाम-ओ-नमूद (دکھا...
एक सवाल ज़हन में पैदा होता है कि इल्म-ए-नाफ़े (फ़ायदा पहुँचाने वाले ज्ञान) की अलामत (निशानी) क्या होती है? जी हाँ, नफ़ा (लाभ) देने वाला इल्म भी होता है। नबी अलैहिस्सलाम ने हमें दुआ...
मुझे याद है कि देवबंद में जब मेरी उम्र तक़रीबन दस-बारह साल थी, एक दिन फज्र की नमाज़ के वक़्त सख़्त आंधी, मूसलाधार बारिश और गरज-चमक की बिना पर (वजह से) वालिद साहब (मुफ़्ती मुहम्मद श...
हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम साहब नानौतवी (रहमतुल्लाही अलैहि) का मुज़फ़्फ़रनगर में एक थानेदार मुअतक़िद (भक्त/प्रशंसक) था। एक दिन उसने हज़रत मौलाना नानौतवी की दावत की। मौलाना ने देखा...
(नोट: इस घोषणापत्र के संबोधित व्यक्ति केवल शरिया विज्ञान (उलूम-ए-शरीयत) के छात्र हैं।) आरिफ़ों (अल्लाह की पहचान रखने वालों) ने शरिया के ज्ञान को इस तरह परिभाषित किया है कि यह अल...
(१) अल्लाह तआला जब किसी को औलाद दे और वह सयानी (समझदार) होने लगे, तो सबसे पहले उसको कलमा-ए-तौहीद (एकेश्वरवाद का मूलमंत्र) सिखाए। फिर उसको ज़रूरी आदाब (शिष्टाचार) सिखाए। (२) जब साम...
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी साहब (रहमतुल्लाह अलैह) की मशहूर तसनीफ़ (पुस्तक) 'हयातुल मुस्लिमीन' के शुरू में "तसहील-ए-मुक़द्दमा" के उनवान (शीर्षक) से मुफ़्ती मोहम्मद शफ़ी साहब (रहमत...
इंसान के अख़लाक़ी वजूद (नैतिक अस्तित्व) को जो खतरनाक बीमारियां लाहक (ग्रसित) हैं, उनमें झूठ और मबालगे (अतिशयोक्ति) पर मबनी (आधारित) जिंदगी गुजारने का फितना (बुराई) आज-कल के दौर में...
जब हज़रत अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने हज़रत बिलाल (रज़ियल्लाहु अन्हु) को कहा... "ऐ काली-कलूटी माँ के बेटे! अब तू भी मेरी ग़लतियाँ निकालेगा...?" बिलाल यह सुनकर ग़ुस्से और अफ...
नाम भी मुज़फ़्फ़र था और रहते भी मुज़फ़्फ़रनगर में थे... पूरा नाम था "नवाब मुज़फ़्फ़र अली ख़ान"। मुज़फ़्फ़रनगर हिंदुस्तान में एक ज़िला है, उन भले दिनों में यह नवाब साहब की जागीर थी।...