पूर्ण स्वतंत्रता का भ्रम: अभिनेत्री हुमैरा असगर की दर्दनाक कहानी
"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो ह...
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"तो हे आँख वालों! इबरत (सीख) हासिल करो।" यह उन लोगों के लिए एक सबक है जो "मेरा जिस्म, मेरी मर्जी" का नारा लगाते हैं। मर्जी भी उसी की थी और जिस्म भी उसी का था, मगर उसके बाद जो ह...
मौलाना रूमी ने सुल्तान महमूद गज़नवी का एक अजीब वाक़या लिखा है जो बड़ा इब्रत-खेज़ (عبرت خیز - शिक्षाप्रद) और सबक़-आमोज़ है। वह यह कि सुल्तान महमूद गज़नवी के ज़माने में चोरों का कुछ...
इमाम अबू नस्र फ़तह बिन अब्दुल्लाह सिंधी (रहमतुल्लाही अलैहि) दूसरी सदी हिजरी के उन उलेमा (विद्वानों) में से हैं जो सिंधी मूल के थे, और सिंध में मुसलमानों के प्रवेश के बाद इस्लाम से...
एक वकील साहब अदालतों में लोगों की पहली पसंद (ترجیح) होते थे। फीस लाखों में थी... बड़े-बड़े अपराधियों (मुजरिमों) को बरी करवा लिया करते थे... आइए! अब उनका इब्रतनाक़ (عبرتناک - शिक्षा...