SIR को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच चुनाव आयोग (ECI) ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में वोटर लिस्ट की गड़बड़ियों पर कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को सस्पेंड करने का आदेश दिया और यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए।
आयोग ने क्या कहा?
UP के CEO नवदीप रिनवा को लिखे पत्र में आयोग ने बताया कि उनकी रिपोर्ट की जांच में मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी आरोपी पाए गए।
इसलिए दोनों को सस्पेंड करने का फैसला किया गया।
FIR दर्ज कर चार्जशीट आगे की जांच के लिए आयोग को सौंपी जाए।
आयोग ने निर्देश दिया कि FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 न लगाई जाए, क्योंकि दोनों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना गया और यह धारा सरकारी कानून न मानने से जुड़ी है।
क्या हैं आरोप?
ERO के कंप्यूटर असिस्टेंट पर आरोप है कि उसने 31 मई से 29 अगस्त के बीच 'करेक्शन' के लिए 13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज किए, जबकि कार्यालय में न फिजिकल फॉर्म थे, न सहायक दस्तावेज।
मामला आयोग तक पहुंचने पर CEO से रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें उन्होंने गड़बड़ियों को माना और दोनों EROs पर कानूनी कार्रवाई की बात कही।
पूरे राज्य में दोबारा जांच के आदेश
संबंधित कोर्ट को दोनों के मामले में सख्ती से कार्यवाही करनी होगी।
पीलीभीत की वोटर लिस्ट की जांच रिपोर्ट एक हफ्ते में आयोग को भेजनी होगी।
राज्य के सभी DEO और ERO को अपने क्षेत्र की वोटर लिस्टों की दोबारा गहन जांच करनी होगी।
फॉर्म-6, 7 या 8 के जरिए नाम जोड़ने, हटाने या बदलने के डेटा का फिर से सत्यापन होगा।
गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद CEO ने राज्य के ERO कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटरों के पासवर्ड डी-एक्टिवेट कर दिए हैं।