admin
11 October, 2024
आह! कोई नहीं, सब गुमराह हो गए; सब निकम्मे निकले, सब गाफ़िल (लापरवाह) हो गए, सब पर मौत की नींद छा गई; सब ने एक ही तरह की हलाकत (विनाश) का घूंट पी लिया, सब एक ही तरह की तबाही पर टूट पड़े; सब ने ख़ुदा को छोड़ दिया, सब ने उसकी मोहब्बत से मुंह मोड़ लिया, सब ने उसके पवित्र रिश्ते को बट्टा लगा दिया (कलंकित...