अश्लीलता को मिटाने के लिए इस्लामी शरिया के पुख्ता इंतज़ामात
शरीयते इस्लामिया ने दुनिया से फ़ह्हाशी (अश्लीलता/बेहयाई) को मिटाने के लिए जो मोहकम (पुख़्ता) इंतज़ामात फ़रमाए हैं, उनका अगर ख़ुलासा (संक्षेप) किया जाए तो तरतीब वार (क्रमशः) दर्ज-ज़ैल उन...
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शरीयते इस्लामिया ने दुनिया से फ़ह्हाशी (अश्लीलता/बेहयाई) को मिटाने के लिए जो मोहकम (पुख़्ता) इंतज़ामात फ़रमाए हैं, उनका अगर ख़ुलासा (संक्षेप) किया जाए तो तरतीब वार (क्रमशः) दर्ज-ज़ैल उन...
एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ...
शायर-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत सैय्यद अमीन गीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) अपनी जेल का वाक़िया बयान करते हुए कहते हैं: "एक दिन जेल का सिपाही आया और मुझसे कहा कि आपको दफ़्तर में सुपरिंटेंडेंट सा...
एक व्यक्ति आपके पास आया और अर्ज़ किया कि कुछ नसीहत फ़रमाइए। आपने फ़रमाया, "छह (6) बातें बताता हूँ, उन पर अमल करो, फिर कुछ भी करोगे तो नुक़सान न पहुँचेगा।" आपने उन छह बातों की व्याख...
समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़मान...
बनू क़ुरैज़ा, जो यहूदियों का एक मशहूर क़बीला है, उसने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ अपने समझौते (मुआहिदे) का उल्लंघन करते हुए ग़ज़वा-ए-ख़न्दक़ (ख़न्दक़ की जंग) में कु...
इंसान के अख़लाक़ी वजूद (नैतिक अस्तित्व) को जो खतरनाक बीमारियां लाहक (ग्रसित) हैं, उनमें झूठ और मबालगे (अतिशयोक्ति) पर मबनी (आधारित) जिंदगी गुजारने का फितना (बुराई) आज-कल के दौर में...
उपमहाद्वीप (पाक-ओ-हिंद) में जब अंग्रेज़ अपने ज़ुल्म-ओ-सितम और ज़्यादतियों के बावजूद मुसलमानों को मग़लूब (परास्त) न कर सका, तो उसने एक कमीशन के ज़रिए इसकी वजह मालूम करने के लिए पूरे...
इमाम मुज़नी (रह.) फ़रमाते हैं: मैं हज़रत इमाम शाफ़ई रहमतुल्लाही अलैहि के पास उनकी मरज़-उल-वफ़ात (अंतिम बीमारी) में हाज़िर हुआ और उनसे अर्ज़ किया: "आपने किस हालत में सुबह की है?" फ़...
हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फ़रमाते हैं कि मैंने अब्बा जान सैयदुना अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से पूछा कि हुज़ूर ﷺ अपने हम-नशीनों (साथियों) के साथ कैसे रहते थे? आपने फ़रम...
हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) के दरबार (अदालत) में एक बाप ने अपने बेटे पर दावा (मुक़दमा) किया कि यह मेरे हुक़ूक़ (अधिकार) अदा नहीं करता! हज़रत उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने लड़के से द...
इमाम अबू नस्र फ़तह बिन अब्दुल्लाह सिंधी (रहमतुल्लाही अलैहि) दूसरी सदी हिजरी के उन उलेमा (विद्वानों) में से हैं जो सिंधी मूल के थे, और सिंध में मुसलमानों के प्रवेश के बाद इस्लाम से...