फ़िलिस्तीनी मुद्दा और हमारी ज़िम्मेदारियाँ
हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी साहब (रहमतुल्लाह अलैह) की मशहूर तसनीफ़ (पुस्तक) 'हयातुल मुस्लिमीन' के शुरू में "तसहील-ए-मुक़द्दमा" के उनवान (शीर्षक) से मुफ़्ती मोहम्मद शफ़ी साहब (रहमत...
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हज़रत मौलाना अशरफ़ अली थानवी साहब (रहमतुल्लाह अलैह) की मशहूर तसनीफ़ (पुस्तक) 'हयातुल मुस्लिमीन' के शुरू में "तसहील-ए-मुक़द्दमा" के उनवान (शीर्षक) से मुफ़्ती मोहम्मद शफ़ी साहब (रहमत...
सुलेमान बिन अब्दुल मलिक, जो बनू उमय्या का बादशाह था, ने एक मर्तबा शैख़-उल-हदीस अबू हाज़िम (रहमतुल्लाह अलैह) से दरयाफ़्त (पूछा) किया कि इसकी क्या वजह है कि हम लोग दुनिया को पसंद और आ...
शरीयते इस्लामिया ने दुनिया से फ़ह्हाशी (अश्लीलता/बेहयाई) को मिटाने के लिए जो मोहकम (पुख़्ता) इंतज़ामात फ़रमाए हैं, उनका अगर ख़ुलासा (संक्षेप) किया जाए तो तरतीब वार (क्रमशः) दर्ज-ज़ैल उन...
एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ...
शायर-ए-ख़त्म-ए-नबुव्वत सैय्यद अमीन गीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) अपनी जेल का वाक़िया बयान करते हुए कहते हैं: "एक दिन जेल का सिपाही आया और मुझसे कहा कि आपको दफ़्तर में सुपरिंटेंडेंट सा...
एक व्यक्ति आपके पास आया और अर्ज़ किया कि कुछ नसीहत फ़रमाइए। आपने फ़रमाया, "छह (6) बातें बताता हूँ, उन पर अमल करो, फिर कुछ भी करोगे तो नुक़सान न पहुँचेगा।" आपने उन छह बातों की व्याख...
समरकंद के इसी सफर में एक आलिम एक नौजवान को इस आजिज़ (शेख पीर ज़ुल्फ़िकार अहमद नक़्शबंदी) से मिलाने के लिए लाए और बताया कि यह वह खुश-नसीब नौजवान है जो रूसी इंकलाब (क्रांति) के ज़मान...
बनू क़ुरैज़ा, जो यहूदियों का एक मशहूर क़बीला है, उसने रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के साथ अपने समझौते (मुआहिदे) का उल्लंघन करते हुए ग़ज़वा-ए-ख़न्दक़ (ख़न्दक़ की जंग) में कु...
इंसान के अख़लाक़ी वजूद (नैतिक अस्तित्व) को जो खतरनाक बीमारियां लाहक (ग्रसित) हैं, उनमें झूठ और मबालगे (अतिशयोक्ति) पर मबनी (आधारित) जिंदगी गुजारने का फितना (बुराई) आज-कल के दौर में...
उपमहाद्वीप (पाक-ओ-हिंद) में जब अंग्रेज़ अपने ज़ुल्म-ओ-सितम और ज़्यादतियों के बावजूद मुसलमानों को मग़लूब (परास्त) न कर सका, तो उसने एक कमीशन के ज़रिए इसकी वजह मालूम करने के लिए पूरे...
इमाम मुज़नी (रह.) फ़रमाते हैं: मैं हज़रत इमाम शाफ़ई रहमतुल्लाही अलैहि के पास उनकी मरज़-उल-वफ़ात (अंतिम बीमारी) में हाज़िर हुआ और उनसे अर्ज़ किया: "आपने किस हालत में सुबह की है?" फ़...
हज़रत हुसैन बिन अली (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) फ़रमाते हैं कि मैंने अब्बा जान सैयदुना अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से पूछा कि हुज़ूर ﷺ अपने हम-नशीनों (साथियों) के साथ कैसे रहते थे? आपने फ़रम...