राजा, वज़ीर और तीन सवाल
एक मर्तबा एक बादशाह ने अपने वज़ीर को आधी सल्तनत देने को कहा, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी आयद (लागू) कीं। वज़ीर ने लालच में आकर शर्तें जानने की दरख़्वास्त की। बादशाह ने शर्तें ३...
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एक मर्तबा एक बादशाह ने अपने वज़ीर को आधी सल्तनत देने को कहा, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी आयद (लागू) कीं। वज़ीर ने लालच में आकर शर्तें जानने की दरख़्वास्त की। बादशाह ने शर्तें ३...
माह-ए-रमज़ानुल मुबारक मुसलमानों के लिए महज़ एक इबादती महीना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महीना है जो न सिर्फ़ व्यक्ति की रूहानी (आध्यात्मिक) तरबियत (प्रशिक्षण) करता है, बल्कि सामाजिक ज...
जंग-ए-इस्कंदरिया (सिकंदरिया के युद्ध) में रूमी एक किले में बंद थे और मुसलमानों ने उस किले की घेराबंदी (محاصرہ) कर रखी थी। एक रोज़ रूमी मैदान में निकले और सिपहसालार हज़रत अम्र बिन अ...
परसों एक किताब पढ़ रहा था۔۔ इस दौरान एक छोटी सी मक्खी उड़ कर मेरी किताब पर आ बैठी۔۔۔ पहले तो मैंने उसको भगा देने की कोशिश की۔۔۔۔ लेकिन वह उड़-उड़ कर किताब पर वापस आ बैठती। यह देख क...
बच्चा ये گالیاں (गालियाँ) कहाँ से सीखता है? सबसे पहले घर से सीखता है। जो बाप बात-बात पर अपनी बीवी को गाली दे रहा हो, अपने बच्चों को गालियाँ दे रहा हो, दोस्तों के साथ निजी महफ़िल और...
शेख मोहम्मद रावी से एक औरत ने सवाल पूछा कि उनके शौहर की वालिदा (माँ) बीमार रहती हैं। शौहर तक़ाज़ा (मांग) करता है कि मैं उनकी माँ की ख़िदमत (सेवा) करूँ और मुझसे यह सब नहीं होता। क्य...
आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आय...
पिछले दिसंबर एक रोज़ जब इंग्लैंड में शदीद (भारी) बर्फबारी हो रही थी और हर किसी को सर्दी ने जकड़ रखा था, तो मैंने अपने ऑफिस की खिड़की से देखा कि मेरा एक साथी इस मुंजमिद (जमा) कर देन...
यज़ीद बिन मलिक एक उमय्यद खलीफा थे, वह नए खलीफा थे जो उमर बिन अब्दुल अज़ीज़ के बाद आए थे। एक दिन वह कहने लगे, "कौन कहता है कि बादशाहों को खुशियाँ नसीब नहीं होतीं...? मैं आज का दिन ख...
नबी करीम ﷺ की तर्बियत का एक तरीक़ा यह था कि पहले ग़लती का एहसास दिलाते थे, फिर नसीहत फ़रमाते थे। एक मर्तबा आप सहाबा इकराम की मजलिस में तशरीफ़ फ़रमा थे, एक नौजवान मस्जिद में दाख़िल...
हज़रत दाऊद बिन रशीद (रह.) फ़रमाते हैं: मुल्क-ए-शाम (सीरिया) में दो हसीन-ओ-जमील इबादतगुज़ार नौजवान रहते थे। कसरत-ए-इबादत (अधिक इबादत) और तक़्वा व परहेज़गारी की वजह से उन्हें 'सबीह'...
शेख़ुल क़ुरआन मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद ज़रवली ख़ान साहब (रह.) फ़रमाते थे: मदारिस (मदरसों) के तलबा (छात्र) बहुत पाक मख़्लूक़ (पवित्र जीव) हैं। एक दिन हमारे मदरसे में एक तालिब-ए-इल्म...