एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद व अयाज़
इमाम अबू यूसुफ रहमतुल्लाह अलैह हारून रशीद के ज़माने में पूरे आलम-ए-इस्लाम के क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात (मुख्य न्यायाधीश) थे, एक बार उनके पास ख़लीफ़ा हारून रशीद और एक नसरानी (ईसाई) का मुक़द...
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इमाम अबू यूसुफ रहमतुल्लाह अलैह हारून रशीद के ज़माने में पूरे आलम-ए-इस्लाम के क़ाज़ी-उल-क़ुज़ात (मुख्य न्यायाधीश) थे, एक बार उनके पास ख़लीफ़ा हारून रशीद और एक नसरानी (ईसाई) का मुक़द...
शेख़-उल-हदीस हज़रत मौलाना मोहम्मद तक़ी उस्मानी साहब (दामत बरकातुहुम) अपनी मशहूर तस्नीफ़ "उलूम-उल-क़ुरआन" में लिखते हैं: "यह पांच तफ़सीरें (यानी तफ़सीर-ए-कबीर, तफ़सीर इब्न कसीर,...
लीसेस्टर (ब्रिटेन) में उलेमा-ए-किराम (विद्वानों) की एक महफ़िल में एक बार हज़रत मौलाना शाह अबरारुल हक़ हरदोई साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ने फ़रमाया: "मान लीजिए कि इंडिया के किसी गांव...
आज के दौर में जब सामाजिक बदलाव और आधुनिक तकनीक (टेक्नोलॉजी) का दबदबा बढ़ता जा रहा है, बच्चों के लिए मोबाइल, टीवी और अन्य मनोरंजन के साधनों में व्यस्त होना आसान हो गया है। इंटरनेट औ...
कितने पुरुष हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अल-माएदा" की तफ़सीर पढ़ाई गई और कितनी महिलाएँ हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अन-नूर" की तफ़सीर पढ़ाई गई? जानता हूँ, बहुत कम हैं।...
शुक्र अदा करने का एक फायदा तो यह होगा कि आपकी की हुई इबादत अल्लाह के हुज़ूर में क़बूल व मंज़ूर होगी क्योंकि अल्लाह को शुक्र बड़ा पसंद है। दूसरा फायदा यह होगा कि अल्लाह की तरफ से इब...
...मदरसा के छात्रों के लिए एक चौधरी साल भर का गेहूं मदरसा के लिए वक्फ (दान) करता था। किसी शरारती (द्वेषी) शख्स ने मौलाना साहब के बारे में दुश्मनी और नफरत का इजहार ऐसा किया कि पता म...
विद्वानों और गणमान्य लोगों (خواص) के वर्ग में कोमलता और मधुर स्वभाव होना अत्यंत आवश्यक है। सख्त लहजे में बात करना और किसी बात पर नाराज़ होना, अगर सुधार और तरबियत (परवरिश) की भावना...
हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) एक बार सफ़र पर जा रहे थे, ग़ालिबन (शायद) हज या उमरे का सफ़र था। साहिबे-हैसियत (धनी) अरबों की आदत के मुताबिक़, आप सफ़र पर जाते हुए सवा...
अल्जीरिया से ताल्लुक रखने वाली नामी और अरब दुनिया की सबसे मक़बूल (लोकप्रिय) एंकर और पत्रकार ख़दीजा बिन्त क़ुन्हा अपने दौरा-ए-अमेरिका (अमेरिका यात्रा) के बारे में बताती हैं कि वह एक...
बहिश्ती जेवर और तालीम-उद-दीन के कुछ स्थानों का सुधार: (१) بہیستی زیور (बहिश्ती जेवर) में इशा के बाद चार सुन्नतें लिख दी गई हैं, सही यह है कि दो सुन्नत हैं और दो नफ़्ल। (२)...
(१) अल्लाह तआला जब किसी को औलाद दे और वह सयानी (समझदार) होने लगे, तो सबसे पहले उसको कलमा-ए-तौहीद (एकेश्वरवाद का मूलमंत्र) सिखाए। फिर उसको ज़रूरी आदाब (शिष्टाचार) सिखाए। (२) जब साम...