ज्ञान में मग्न रहने की अद्भुत और दिलचस्प घटनाएँ
सल्फ़-ए-सालिहीन (नेक पूर्वजों), मुहाद्दिसीन (हदीस के विद्वानों) और फ़ुक़हा (शरिया कानून के विशेषज्ञों) पर इल्म (ज्ञान) में व्यस्त रहने का किस कदर ग़लबा (असर) था, इसका कुछ अंदाज़ा न...
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सल्फ़-ए-सालिहीन (नेक पूर्वजों), मुहाद्दिसीन (हदीस के विद्वानों) और फ़ुक़हा (शरिया कानून के विशेषज्ञों) पर इल्म (ज्ञान) में व्यस्त रहने का किस कदर ग़लबा (असर) था, इसका कुछ अंदाज़ा न...
हम में से किसी भी इंसान की जवानी जब ढलने लगती है और वह अधेड़ उम्र की तरफ बढ़ने लगता है, तो अमूमन बाल सफ़ेद होने शुरू होते हैं। जब बाल सफ़ेद होना अभी शुरू ही हुए हों, तब अगर किसी इं...
दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...
इमाम क़ुर्तुबी (रह.) फ़रमाते हैं कि क़बीला-ए-अशअरीयीन के लोग जब हिजरत करके मदीना मुनव्वरा पहुँचे, तो उनका खाने-पीने का तमाम सामान ख़त्म हो चुका था। चुनाँचे उन्होंने अपना एक आदमी रस...
बहुत समय पहले एक जगह सेब का एक बहुत बड़ा पेड़ था और रोजाना एक बच्चा वहाँ आकर उस पेड़ के इर्द-गिर्द खेला करता था। वह बच्चा उस पेड़ की टहनियों से चिपक-चिपक कर उसकी चोटी पर चढ़ता, उसक...
एक मर्तबा एक बादशाह ने अपने वज़ीर को आधी सल्तनत देने को कहा, लेकिन साथ में कुछ शर्तें भी आयद (लागू) कीं। वज़ीर ने लालच में आकर शर्तें जानने की दरख़्वास्त की। बादशाह ने शर्तें ३...
माह-ए-रमज़ानुल मुबारक मुसलमानों के लिए महज़ एक इबादती महीना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा महीना है जो न सिर्फ़ व्यक्ति की रूहानी (आध्यात्मिक) तरबियत (प्रशिक्षण) करता है, बल्कि सामाजिक ज...
जंग-ए-इस्कंदरिया (सिकंदरिया के युद्ध) में रूमी एक किले में बंद थे और मुसलमानों ने उस किले की घेराबंदी (محاصرہ) कर रखी थी। एक रोज़ रूमी मैदान में निकले और सिपहसालार हज़रत अम्र बिन अ...
परसों एक किताब पढ़ रहा था۔۔ इस दौरान एक छोटी सी मक्खी उड़ कर मेरी किताब पर आ बैठी۔۔۔ पहले तो मैंने उसको भगा देने की कोशिश की۔۔۔۔ लेकिन वह उड़-उड़ कर किताब पर वापस आ बैठती। यह देख क...
बच्चा ये گالیاں (गालियाँ) कहाँ से सीखता है? सबसे पहले घर से सीखता है। जो बाप बात-बात पर अपनी बीवी को गाली दे रहा हो, अपने बच्चों को गालियाँ दे रहा हो, दोस्तों के साथ निजी महफ़िल और...
शेख मोहम्मद रावी से एक औरत ने सवाल पूछा कि उनके शौहर की वालिदा (माँ) बीमार रहती हैं। शौहर तक़ाज़ा (मांग) करता है कि मैं उनकी माँ की ख़िदमत (सेवा) करूँ और मुझसे यह सब नहीं होता। क्य...
आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आय...