पाकीज़ा है वह ज़ात जिसने सब मख़्लूक़ात (सृष्टि) को फ़ना (नष्ट) करने का फ़ैसला फ़रमाया है। इस हैसियत से बादशाह और ग़ुलाम सब उसके नज़दीक बराबर हुए। सिर्फ़ ख़ुद को बक़ा (अमरता) के साथ मुनफ़रिद (अकेला) किया और क़दामत (शाश्वतता) में भी अपने आप को वाहिद (एक) रखा। अपनी क़ुदरतों को दुनिया वगैरह में जैसे चाह...