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उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं

उलेमा (विद्वान) ही औलिया (अल्लाह के मित्र) हैं

यह्या बिन यह्या बयान करते हैं: जब इमाम मालिक (रहमतुल्लाह अलैह) की मृत्यु-शय्या की बीमारी लंबी हो गई और अंतिम समय करीब आ गया, तो मदीना मुनव्वरा और अन्य शहरों से सभी उलेमा (विद्वान)...

09 Jul, 2026 और पढ़ें
वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

वहदत-ए-दीन न कि वहदत-ए-अदयान (दीन की एकता, न कि धर्मों की एकता)

🖋 मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी - शम्अ-ए-फ़रोज़ां 🕯 अल्लाह तआला ने हर चीज़ के लिए एक रास्ता बनाया है, इसी रास्ते से उस चीज़ को हासिल करने में इंसान की भलाई है और इस रास्ते...

14 Jun, 2025 और पढ़ें
सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

सहाबा की शान पर एक अनोखा लेख

लेखक: मुहद्दिस-ए-अस्र अल्लामा सैयद मुहम्मद यूसुफ बनूरी (रहमतुल्लाह अलैह) बात तो बिल्कुल साफ है कि सहाबा (पैगंबर के साथी) जैसे भी हों, मगर वे तुम से तो अच्छे ही होंगे। तुम हवा मे...

12 Jun, 2025 और पढ़ें
अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

अपनी ज़िंदगी का जायज़ा

दुनिया में जो भी आया, कूच करने को आया। दफ़्न ख़ुद सैंकड़ों किए ज़ेर-ए-ज़मीन। फिर भी मरने का नहीं हक़-उल-यक़ीन। तुझसे बढ़कर कोई ग़ाफ़िल नहीं। कुछ तो इब्रत चाहिए ऐ नफ़्से लईन।...

06 Jun, 2025 और पढ़ें
नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

नमाज़ की बरकत और इंसान की फ़ितरत

आज फज्र के बाद मैं तिलावत (कुरान का पाठ) कर रहा था तो सूरह अल-मआरिज की एक आयत पर आकर रुक सा गया। बात इंसान की तख़्लीक़ (सृष्टि) के बारे में थी कि इंसान असल में पैदा कैसा हुआ है। आय...

03 Dec, 2024 और पढ़ें
हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है

हासिद (ईर्ष्यालु) की सज़ा, आपका सब्र है

इमाम अबू हनीफ़ा (रहमतुल्लाही अलैहि) के वालिद साहब का इंतक़ाल हो गया। तीन दिन ताज़ियत (शोक) के लिए बैठे रहे, तीन दिन के बाद बाहर निकल कर चौक में आ गए। एक शख़्स आपका हासिद (ईर्ष्या क...

23 Nov, 2024 और पढ़ें
गिलास मत बने रहो बल्कि झील बन जाओ

गिलास मत बने रहो बल्कि झील बन जाओ

एक नौजवान अपनी ज़िंदगी के मामलात से काफ़ी परेशान था। एक रोज़ एक दरवेश से मुलाक़ात हो गई तो अपना हाल कह सुनाया। कहने लगा कि बहुत परेशान हूँ। यह दुख और परेशानियाँ अब मेरी बर्दाश्त से...

20 Nov, 2024 और पढ़ें
इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

इल्म का मंशूर: शरियत के विद्यार्थियों (तलबा) के लिए महत्वपूर्ण और इब्रतनाक नसीहतें (भाग दो)

बिस्मिल्लाह; रब्बी यस्सिर व अ'इन! (अल्लाह के नाम से; ऐ मेरे रब, आसानी फ़रमा और मदद कर!) नोट: इस मंशूर (घोषणापत्र) के मुखातिब (संबोधित लोग) सिर्फ उलूमे शरीयत (इस्लामी शास्त्र के ज...

12 Nov, 2024 और पढ़ें
युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ

युवा पीढ़ी की तरबियत: शरीयत बनाम सामाजिक परंपराएँ

कितने पुरुष हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अल-माएदा" की तफ़सीर पढ़ाई गई और कितनी महिलाएँ हैं जिन्हें बालिग होते ही "सूरह अन-नूर" की तफ़सीर पढ़ाई गई? जानता हूँ, बहुत कम हैं।...

09 Nov, 2024 और पढ़ें
अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

अल्लाह का ख़ौफ़ और मग़्फ़िरत: सहीह मुस्लिम की एक ईमान अफ़रोज़ हदीस

एक हदीस हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मर्वी (वर्णित) है... फ़रमाते हैं कि एक मर्तबा हुज़ूर अक़्दस (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पिछली उम्मतों के एक शख़्स का वाक़िया बयान फ...

26 Oct, 2024 और पढ़ें
हज़रत इब्राहिम बिन अदहम (रह.) की छह बहुमूल्य नसीहतें

हज़रत इब्राहिम बिन अदहम (रह.) की छह बहुमूल्य नसीहतें

एक व्यक्ति आपके पास आया और अर्ज़ किया कि कुछ नसीहत फ़रमाइए। आपने फ़रमाया, "छह (6) बातें बताता हूँ, उन पर अमल करो, फिर कुछ भी करोगे तो नुक़सान न पहुँचेगा।" आपने उन छह बातों की व्याख...

24 Oct, 2024 और पढ़ें
इमाम शाफ़ई (रह.) की मरज़-उल-वफ़ात (अंतिम बीमारी) की हालत

इमाम शाफ़ई (रह.) की मरज़-उल-वफ़ात (अंतिम बीमारी) की हालत

इमाम मुज़नी (रह.) फ़रमाते हैं: मैं हज़रत इमाम शाफ़ई रहमतुल्लाही अलैहि के पास उनकी मरज़-उल-वफ़ात (अंतिम बीमारी) में हाज़िर हुआ और उनसे अर्ज़ किया: "आपने किस हालत में सुबह की है?" फ़...

22 Oct, 2024 और पढ़ें